अमीश त्रिपाठी: एक लेखक! जो कल्पना में सत्य गढ़ रहा है।
जहां एक ओर हम यह पढ़ते हैं कि हमारे युगपुरुष मनु और शत्रुपा थे, वही हम यह भी पढ़ते हैं कि हमारी प्राचीन सभ्यता थी – सिंधु घाटी सभ्यता। इसी तरह अगर हम दूसरे धर्मों की बात करें तो हर धर्म अपना प्रादुर्भाव अलग-अलग तरीकों से बयां करता है। ऐसे में कोई संवेदनशील इंसान अगर शिरों को जोड़ने का प्रयास करे और कल्पना के अंतिम पड़ाव पर पहुंच, सत्य को उनसे जोड़ रहा हो तो वह काम आज के दौर में कर रहे हैं अमीश त्रिपाठी।

द इम्माॅर्टल ऑफ मेलुहा 2010.. द सीक्रेट ऑफ नागास 2011.. द ओथ ऑफ द वायुपुत्रास 2013… के माध्यम से शिव की एक नई तस्वीर सामने लाने वाले अमीश ने शिव के ईश्वरत्व को एक महामानव के तौर पर पेश किया है। शिव का मुख्य आकर्षण ही विरोधाभास है… वैराग्य में पूर्ण पति और पिता, जटा-जूट धारी समाज से बाहर… लेकिन नृत्य और संगीत के भगवान। इन्हीं विरोधाभासों को साध कर अमीश ने अपनी रचनाओं में एक नए संसार का सृजन किया है। जहां मेलुहा सिंधु घाटी सभ्यता की उन्नत संस्कृति से जुड़ा हुआ प्रदेश है। जिसकी स्थापना की है राम ने।

इन की सभी किताबें 9000 साल से 12000 साल पहले की कहानी कहती हैं। अभी तक कुल 6 किताबों में सभी कहानियां एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं। पहली तीन शिवा ट्रॉयोलॉजी, उसके बाद राम, फिर सीता, फिर रावण | आगे दो किताबें राम पर आनी बाकी है |

18 अक्टूबर 1974 को मुंबई में जन्मे अमीश एक संस्कारी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनका परिवार धर्म और संस्कृति से जुड़ा हुआ पूजा पाठ करने वाला एक आम परिवार है। अपने सामान्य से परिवेश में आई.आई.एम. कोलकाता से ग्रेजुएशन कर, बैंकिंग की नौकरी करते हुए इन्होंने केवल अपने लिए अपने विचारों की संतुष्टि के लिए लिखना शुरू किया। पौराणिक धर्म ग्रंथों में अवस्थित सभी प्रमुख पात्रों का नवीन चित्रण करते हुए अमीश आगे मनु ब्रह्मा रूद्र मोहिनी, परशुराम फिर महाभारत सभी के पुनः सृजन की तैयारी कर चुके हैं।

अमीश समाज का वह आइना दिखाते हैं जहां कर्म के अनुसार वर्ण का चुनाव होता था। जहां भील पुत्र वाल्मीकि ब्राह्मण थे। कोई अपने किए गए कार्य के आधार पर वर्णाश्रम में बंटता था। जन्म के अनुसार नहीं। सदियों से चली आ रही धर्म की धारा को छेड़ने वाले अमीश ऐसा नहीं है कि ईश्वर को ना मानते हो, नास्तिक हों। उनकी ईश्वर में पूर्ण श्रद्धा है और इसी कारण शायद वह विवादों से भी अभी तक बचे रहे।

जबरदस्त रूप से बिकने वाली उनकी किताबें अब तक छह मिलियन के लगभग बिक चुकी हैं जिसकी कीमत 120 करोड़ से भी ज्यादा है।19 भारतीय और विदेशी भाषाओं में यह किताबें ट्रांसलेट हुई हैं। अमीश का नाम फोर्ब्स की लिस्ट में सबसे ज्यादा प्रभावशाली सेलिब्रिटीज में शामिल हो चुका है। इनकी किताबों पर हॉलीवुड की फिल्में भी बनी है।

रेमंड क्रॉस बुक अवार्ड ,दैनिक भास्कर लिटरेचर अवॉर्ड ,सोसायटी यंग अचीवमेंट अवॉर्ड ,रेडियो सिटी मैन ऑफ द ईयर अवार्ड ,प्राइस ऑफ इंडिया अवार्ड सहित कई अवार्ड मिल चुके हैं। इक्ष्वाकु के वंशज में दो किताबें अभी आनी बाकी है। आशा है आने वाली किताबें भी नए समय में सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करें।