देश की शिक्षा नगरी के रूप में मशहूर कोटा शहर राजस्थान का एक प्रमुख औद्योगिक तथा एजुकेशनल शहर है। बढ़ती जनसंख्या और बेरोजगारी के इस दौर में हर आम इंसान अपना भविष्य सुरक्षित करना चाहता है। इसका मतलब सीधे तौर पर बच्चों की बेहतर शिक्षा और उनका प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्तीर्ण होना ही है। इन सब के लिए जो सबसे उपयुक्त स्थान अभिभावकों की नजर में सबसे पहले दृष्टिगत होता है वह है शहर ‘Kota’। करोड़ों अभिभावकों की महत्वाकांक्षाओं का बोझ उठाए कोटा आज दुनिया का सातवां सबसे ज्यादा भीड़भाड़ वाला शहर बन चुका है। ‘Kota’ की खास पहचान यहां के कोचिंग इंस्टिट्यूट हैं। कोटा को भारत की कोचिंग राजधानी भी कहा जाता है ।

चंबल नदी के पूर्वी तट पर बसे इस शहर का इतिहास राजा कोटिया भील से शुरू होता है। राजा कोटिया भील के नाम से प्रसिद्ध हुआ यह शहर, जहां इन्होंने नीलकंठ महादेव का मंदिर स्थापित किया।
‘Kota’ शहर नवीनता और प्राचीनता का अनूठा मिश्रण है। एक तरफ जहां शहर के स्मारक, महल, संग्रहालय तथा बाग बगीचे प्राचीनता का बोध कराते हैं। वहीं दूसरी ओर चंबल नदी पर बना हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट, मल्टी मेटल उद्योग तथा विभिन्न मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज और कोचिंग संस्थान नवीनता का आभास कराते हैं।

कोटा के प्रमुख आकर्षणों में यहाँ स्थित खूबसूरत बगीचे हैं। चंबल गार्डन एक खूबसूरत पिकनिक स्पॉट है। यह गार्डन चंबल नदी और अमर निवास के समीप स्थित है। यहां मगरमच्छों का तालाब भी देखा जा सकता है। गणेश उद्यान कोटा का दूसरा सबसे मुख्य उद्यान है। इसके अलावा सीवी गार्डन यहां का ऐतिहासिक गार्डन है जहां आज भी कोटा के ऐतिहासिक सौंदर्य को महसूस किया जा सकता है।

माधव सिंह संग्रहालय और सरकारी संग्रहालय यहां स्थित प्रमुख संग्रहालय हैं । कोटा राज्य के प्रथम शासक राव माधो सिंह के नाम से प्रसिद्ध संग्रहालय राजस्थान का सबसे बेहतरीन संग्रहालय माना जाता है। यहां कोटा की खूबसूरत पेंटिंग, मूर्तियां, तस्वीरें, हथियार और शाही वंश से संबंधित अन्य अनेक वस्तुएं भी देखी जा सकती हैं। सरकारी संग्रहालय में दुर्लभ हस्तियों और चुनिंदा हडोटी मूर्तियों का विस्तृत संग्रह है।

सिटी फोर्ट पैलेस, जग मंदिर महल,तथा देवता जी की हवेली यहां स्थित प्रमुख महल हैं। सिटी फोर्ट पैलेस राजस्थान के सबसे विशाल किले परिसरों में एक है। जग मंदिर महल कोटा की एक रानी द्वारा 1740 ईस्वी में बनवाया गया था। खूबसूरत किशोर सागर झील के मध्य बना यह महल राजाओं के आमोद प्रमोद का स्थान था। इसके अलावा देवता जी की हवेली अपने अनोखे भित्ति चित्रों और चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।

‘Kota’ आर्थिक रूप से मुख्यतः शिक्षा क्षेत्र पर ही निर्भर है। यहां हर साल लगभग तीन लाख बच्चे देश भर से आईआईटी, मेडिकल इत्यादि के कोचिंग के लिए आते हैं। यहां कई प्रकार के कारखाने भी हैं, जिनमें रसायन तथा प्रौद्योगिकी संबंधित कारखाने प्रमुख हैं।

अपनी ईमानदारी के लिए भी ‘Kota’ शहर देश में टॉप टेन सूची में शामिल है। शहर के पुलिसकर्मी कमलेश बिश्नोई को अपनी ईमानदारी के लिए 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के हाथों सम्मानित किया जा चुका है।
‘Kota’ अपनी विशेष सूती व कोटा डोरिया साड़ियों के लिए भी प्रसिद्ध है। युवा वर्ग की अच्छी खासी आबादी वाला यह शहर अपनीे बाहर से गए युवा आबादियों से घिरा हुआ है। इतनी घनी आबादी के पसंद का ध्यान रखते हुए कचौरी यहां का प्रमुख भोज्य पकवान है। अलग अलग प्रांत के लोगों के कारण यहां हर प्रकार के व्यंजन आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं।

शिक्षा की महत्वाकांक्षा से दबा यह शहर पिछले कुछ वर्षों में छात्रों के आत्महत्या के बढ़ते ग्राफ के कारण एक मानसिक संकट से जूझ रहा है। अत्यधिक बोझ और तनाव का हिस्सा होकर कहीं छात्र ऐसा कदम तो नहीं उठा रहे? या फिर कारण कुछ और ही है? इसी कारण से कई कोचिंग सेंटरों ने काउंसलर भी नियुक्त किए हैं, और छात्रों की मदद के लिए मनोरंजक गतिविधियों का भी आयोजन कर रहे हैं। अपने बच्चों पर अपनी अभिलाषाओं का बोझ लादे अभिभावक उन्हें प्रमुख कोचिंग स्थल ‘Kota तो भेज देते हैं, पर क्या वह बच्चा उस परिवेश और उन जिम्मेदारियों का बोझ उठाने को तैयार है? या नहीं? इसका फैसला कौन करेगा बच्चा अभिभावक या शहर कोटा……