हम सब जानते हैं कि पृथ्वी घूर्णन और परिक्रमण करती है हर क्षण-हर पल। पर क्या आपने कभी जानने की कोशिश की कि यह गति कितनी है?

चलिए आज जानते हैं…पृथ्वी के घूर्णन (Rotation) की गति है – 1,600 किलोमीटर प्रति घंटे और पृथ्वी के परिक्रमण (Revolution) की गति है – 1,07,000 किलोमीटर प्रति घंटे या फिर 30 किलोमीटर प्रति सेकंड यानी आपके एक वाक्य पढ़ने तक, जिसमें कि आप तकरीबन 3 सेकेंड लगाते हैं, वह स्पेस में 450 किलोमीटर चल चुकी होगी!

क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि यह गति कितनी है! सबसे तेज ट्रेन – शंघाई-मैगलेव – 431 किलोमीटर प्रति घंटे, वॅक्स्वैगन की नवीनतम – बुगाती शिरॉन सुपर स्पोर्ट 300+ कार – 489 किलोमीटर प्रति घंटे एवं जेट एरोप्लेन की औसतन 925 किलोमीटर प्रति घंटे की गति शायद आपको यह कल्पना करने में मदद करे!

अब भी क्या यह गति कल्पनीय है? मेरे लिए तो नहीं…इस अकथ्य अकल्पनीय गति से हर क्षण घूमते-घूमते भागती हुई पृथ्वी पर हम सब आराम से खा – पी – सो और मजे कर रहे हैं… आश्चर्य!

अब अगला सवाल – यदि पृथ्वी इतनी अधिक गति से घूम रही है, तो हमें कभी किसी भी क्षण यह महसूस क्यों नहीं होता? क्योंकि हम भी उसी गति से उस पर उसके साथ साथ घूम रहे हैं यह कुछ ऐसा ही है जैसा चलते हुए हवाई जहाज में चाय कॉफी या अन्य पेय पदार्थ पेश करती हुई प्रसार सेविका निश्चिंत भाव से सब वितरित करती रहती है और एक भी बूंद इधर-उधर नहीं गिरता या फिर तेज गति से चलती बुलेट ट्रेन के भीतर आराम से शतरंज की बाजी चलती रहे…

अब आप यह भी कह सकते हैं कि बस, रिक्शा, ऑटो रिक्शा में तो हम आराम से कॉफी के कप का लुत्फ नहीं ले सकते या लूडो-शतरंज की बाजी नहीं लगा सकते…ऐसा क्यों? कारण यह है कि यहां आप की गति घटती बढ़ती रहती है – अतः ‘इनरशिया एफेक्ट’ काम करता है – जिस वजह से चीजें इधर-उधर हिलती डुलती रहती हैं और हम सब परेशान हो जाते हैं…

अब एक बार आंखें मूंद बैठे और कल्पना करें – 12,742 किलोमीटर व्यास और 5.972 गुणे 10 के ऊपर 24 शून्य किलोग्राम, यानी 5,972 के ऊपर 21 शून्य डाले किलोग्राम वजन की पृथ्वी- अपने ऊपर 500 किलोमीटर ऊंचाई का वातावरण लिए, अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग मौसम साथ लिए पृथ्वी – 1,600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से अपने अक्ष पर नाचती और साथ- साथ 1,07,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से भागती पृथ्वी – और उस पर आराम से बैठे हम – कितने निश्चिंत – कितने बेखबर – सभी आनंद भोगते …

क्या हो यदि अचानक सब रुक जाए… यानि हमारी पृथ्वी हमारी तरह ‘रेस्ट’ लेने को एक दिन झट से कुछ पलों के लिए रुक जाए – एक जबरदस्त झटका… और… सब कुछ खत्म…